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श्री देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी (डी-एस-बी-) इन्टरनेशनल पब्लिक स्कूल के
संस्थापक
श्री ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी
आर्दश संचालक में जो लक्षण होते हैं उनसे भी विशेष एवं उत्कृष्ट लक्षण सफल नेतृत्व
में होते हैं। सफल नेतृत्व सम्पन्न व्यक्ति सफलतम संचालक होता है, ऐसे शुभलक्षणों
की स्थापना कर उनका सम्यक् संवर्धन, एवं संचालन कर उन्हें उच्चतम शिखर पर ले जाते
हैं।
श्रद्धेय ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी भी अपने देव भगवान को सच्ची भावाञजलि एवं
श्रद्धाञजलि अर्पित करने की पावन भावना से उनके संकल्पानुरूप
गंगा के पवित्र तट
ऋषिकेश की भूमि पर अप्रैल 2007 में डी-एस-बी- इण्टरनेशनल पब्लिक स्कूल की स्थापना
की, जो निरन्तर अपूर्वगति से प्रगतिपथ पर अग्रसर है जिसके कुछ प्रसंग अवलोकनीय हैं-
वर्ष 2008 में शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति व छात्रों के विकास तथा रूचि को जाग्रत
करने में विद्यालय का प्रयास सराहनीय रहा है। विद्यालय में होने वाली
शैक्षणिक गतिविधिओं में सर्वप्रथम नित्य प्रार्थना सभा में होने वाले
‘‘गायत्री मन्त्र’’
का पाठ है, जिसके द्वारा बच्चों में अपनी संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास किया जाता
है। विद्यालय के ऐसे ही अनेक प्रयासों ने बच्चों में नवीन चेतना व उत्साह को भरने
का सार्थक कदम उठाया तथा छात्रों ने इसके अनुरूप ही अपनी प्रतिभा का परिचय समय् पर
दिया।
इन सभी गतिविधियों के साथ विद्यालय के विकास में नवीन अध्याय
जुड़ते गये, जिसके
अन्तर्गत विद्यालय परिसर में
‘‘यशोदा देवी कन्या छात्रावास का उद्घाटन समारोह’’ प्रमुख रहा। 6 जुलाई 2008 को आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के अध्यक्ष
’श्री ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज’ द्वारा की गई तथा छात्रावास का उद्घाटन
माननीय श्री आर -के- धवन’ तथा परमपूज्य
‘ स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि
जी’ महाराज के
करकमलों द्वारा किया
गया।
विद्यालय के प्रमुख कार्यक्रम
‘स्वतंत्रता दिवस’ की अध्यक्षता ऋषिकेश नगरपालिका
अध्यक्ष श्री दीप शर्मा जी द्वारा की गयी।
जहाँ छात्रों ने ध्वज को सलामी देते
हुए मार्च-पास्ट का प्रदर्शन किया तथा साथ ही रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए
गए।
सितम्बर 2008 को माननीय
श्री एम-एल- लोहिया जी द्वारा भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन
‘श्री ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज’ के सात्रिध्य में किया गया। जिसके
अन्तर्गत बच्चों की उत्सुकता ने उन्हें काफी कुछ सीखने का अवसर प्रदान किया।
इसी दिशा में चल रहे प्रयासों में एक प्रयास छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखना
भी रहा, जिसमें 15 नवम्बर 2008 को श्रीमती फुली देवी कन्या छात्रावास का निर्माण
सराहनीय रहा। कन्याओं के विकास व उनको जनजीवन के अनेकों अवसर प्रदान करनें के इस
कार्य का उद्घाटन माननीय
श्री जनलार्दन द्विवेदी जी
के काकमलसें द्वारा किया गया।इस
अवसर पर ‘‘केसरी देवी लोहिया पब्लिक स्कूल कुरूक्षेत्र’’
से आयी छात्राओं ने
हरियाणवी लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।
बच्चों के शारीरिक विकास हेतु विद्यालय में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन
किया गया तथा बच्चों की आत्मरक्षा हेतु जुड़ों-कराटे तथा आध्यात्मिक विकास हेतु योग
का प्रशिक्षण बालक व बालिका वर्ग की दौड़ गोला फेंक, थ्री लैग रेस आदि प्रमुख रहीं।
इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा दिया गया योगासनों का प्रस्तुतीकरण भी अति उत्तम
रहा।
बच्चों में वैदिक परम्परा जीवित रखनें व स्मरण कराने के लिए विद्यालय में आयोजित
प्रदर्शनी ‘‘अभिव्यक्ति’’ में भारतीय प्राचीन शिक्षा पद्धति
‘‘गुरूकुल’’
कर जीवन्त
उदाहरण प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी के ही माध्यम से
‘‘हिन्दी भाषा’’ की जानकारी
भी प्रदान की गयी, जिसमें हिन्दी के माहन साहित्यकारों व कवियों के जीवन तथ्य,
हिन्दी का स्वर्ण युग-भक्तिकाल की प्रमुख शाखाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की
गयी।
प्रदर्शनी के ही माध्यम से अन्य विषयों जैसे अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक
विज्ञान आदि अनेकों विषयों के प्रति रूची बढ़ाने का भी यह प्रदर्शनी एक सार्थक
प्रयास रही।
इसके साथ ही 23 दिसम्बर 2008 को विद्यालय ने अपना प्रथम वार्षिकोत्सव अत्यन्त
धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया। विद्यालय संस्थापक
‘श्री ब्रह्मस्वरूप
ब्रह्मचारी जी महाराज’ तथा अन्य गणमान्य अतिथि इस अवसर पर उपस्थित रहे। विद्यालय
प्रधानार्चाय महोदय द्वारा विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुतियों द्वारा
कार्यक्रम को पूर्णता प्रदान की गई, जिसमें छात्रावास में रह रहे विद्यार्थियों
द्वारा संगीत के साथ वाद्य-यन्त्रों के माध्यम से एक मन्त्रमुग्ध प्रस्तुति दी गई।
इन सभी क्रियाकलापों के अलावा 26 जनवरी, 2008 को विद्यालय की प्रथम पत्रिका
"FRAGRANCE" का विमोचन माननीय
श्री कृष्ण शर्मा जी तथा श्री विनोद बग्रवाल जी द्वारा किया गया जो
कि विद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि रहा जिसमें विद्यालय के सभी छात्र छात्रओं के
साथ-साथ विद्यालय अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा भी पत्रिका में प्रकाशित लेखों ने
पत्रिका को महाकाया तथा छात्रों का उत्साहवर्धन भी किया।
विद्यालय में समय पर विषयों की रूचि को बढ़ाने के लिए कम्प्यूटर तथा चित्रों व
खिलौनों के माध्यम से भी छात्रों को ज्ञान प्रदान किया गया तथा संगीत की भी उचित
शिक्षा दी गयी।
विद्यालय के द्वारा छात्रों के मनोरंजन का भी पूर्ण घ्यान रखा जाता है। समय पर
छात्रों को ‘शैक्षणिक भ्रमण’ पर भी ले जाया गया, जिसमें
‘टिहरी डैम’ की यात्रा
प्रमुख रही। इसके अलावा
‘फन-वैली’ ‘जयराम आश्रम कृषि फार्म’
‘रेलवे-स्टेशन तथा
तारघर की यात्राए प्रमुख रहीं व विद्यालय के हर वर्ग के छात्र छात्रओं ने इसमें
भाग लिया।
विद्यालय के इन सभी विकास कार्यो को देखते हुए आशा है कि ब्रह्मलीन
श्री
‘‘देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज’’ का वरदहस्त तथा अक्ष्यक्ष श्री
ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज के सान्निध्य तथा संस्था के साथ शुभ -चिन्तकों
के सहयोग से विद्यालय आने वाले समय में भी उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा।
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