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सन्तवरों की जन्ममूमि
है, यहां सदैव
परोपकार कार्यप्रणाली
मे संलग्न होता है
सन्तगण। ऐसे साधुवर
श्री जयराम जी का
शिष्य बनकर अन्नदान,
वेदाभ्यास,
संस्कृत-शिक्षा,
गोसेवा आदि बहुविध
कार्यक्षेत्रों में
अपना ध्यान लगाने वाले
है श्री
देवेन्द्रस्वरूप
ब्रह्मचारी। इनके अथक
परिश्रम के फल रूप ही
है श्री जयराम आश्रम,
जिसके द्वारा उपरोक्त
बहुमुखी सेवाकार्य
सम्पूर्ण होता रहता
है। |
श्री काञ्ची
कामकोटि पीठ
महास्थानम
कांचीपुरम् |
नारायण स्मृति,
जगद्गुरू |
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तुम तो मेरी आत्मा हो
, तुमने मानवता का
महान् उपकार किया है। |
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देवरहा बाबा
वृन्दावन |
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धर्म प्रेरणा के
स्त्रोत जयराम
अन्नक्षेत्र, जयराम
गोशाला, जयराम आश्रम
की वृद्धि एवं समाज
में सत्कीर्ति की
प्रस्थापना जिन
महापुरूष के द्वारा
हुई है वे है
श्रद्धेय श्री
देवेन्द्ररूवरूप
ब्रह्मचारी महाराज।
गत चालीस वर्षो में
मुझे उनके अनेक
स्वरूपों का परिचय
हुआ है। न्यायाधीश,
नगरपालिकाध्यक्ष,
आश्रमाध्यम, सन्तसेवी
स्वाध्यायनिपुण,
गोप्रेमी व्यवहारकुशल
एवं सिद्ध संचालन की
दृष्टि से वे एक ऐसे
सत्यपुरूष है, जिनसे
प्रेरणा लेकर साधक
अपनी जीवन यात्रा को
सफल कर सकते है।
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समन्वय कुटीर,
सप्तसरोवर
हरिद्वार- 249090 (उत्तराखण्ड)
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स्वामी
सत्यमित्रानन्द
संस्थापक- ‘भारत माता
मन्दिर’ |
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‘‘श्रेय: कुर्वन्ति
भूतानां साधवों
दुस्त्यतजासुभि:’’
श्रीमद्भावत का यह
निर्देश कि साधु लोग
प्राणर्पण करके भी
समस्त प्राणियों का
कल्याण करते है- यह
बात ब्रह्मचारी जी पर
पूर्णतया घटती है।
बह्मचारी जी ने अपना
समूचा जीवन समाज की
उत्कृष्ट सेवा में
व्यतीत किया है।
गोसेवा, यात्री सेवा
अन्नक्षेत्र संचालन
तथा अस्पतालों से
समाज की अनन्त सेवा
की। आप देववाणी के
उपासक है तथा संस्कृत
के प्रचार-प्रसार में
सतत प्रयत्नशील रहे
है। |
बाबा दूधाधारी हरिगिरि
गोशाला
उचाना (जीन्द) हरियाणा
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-स्वामी गणेशानन्द
गिरि |
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ब्रह्मचारी जी एक
कर्मठ महात्मा हैं
जिनकी स्मरण शक्ति
बेजोड़ है। इन्होंने
अपने दीर्घ जीवनकाल
में लगभग एक दर्जन
श्री जयराम संस्थाओं
को स्थापित कर
पल्लवित-पुष्पित किया
है, जिनमें
अन्नक्षेत्र, संस्कृत
महाविद्यालय, वेदपाठी
संस्था, चिकित्सालय,
देवालय, गोशाला, धर्म
यात्री निवास आदि
प्रमुख है। श्री
जयराम आश्रम की
प्रत्येक शाखा में
सामान्य जनसे लेकर
विशिष्ट व्यक्तियों
के निवास की समुचित
व्यवस्था है, जहॉ यह
ध्यान रखा जाता है कि
कोई व्यक्ति निराश
वापस न हो।
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श्री दूधाधारी बर्फानी
आश्रम
भूपतवाला, हरिद्वार |
-प्रभुदास,
अध्यक्ष
श्री
राघवेन्द्र सेवा
आश्रम समिति |
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परम पूज्य बह्मचारी
जी महाराज के सम्पर्क
में रामकथा के माध्यम
से आना हुआ।
रामचरितमानस का श्रोता
कैसा हो इसका
प्रतिपादन स्वयं मानस
ने किया है कि
‘‘श्रोता सुमति सुशील
शुचि कथारसिक हरिदास’’।
ये सभी लक्षण पूज्य
महाराजश्री पर खरे
उतरते है। सही अर्थ
में महाराजश्री
कथाव्रती है। इतने
विद्वान होते हुए
करीब-करीब सभी विषय
का अधिकारी होते हुए
मानस में आपकी रूचि
और भाव प्रेरणादायी
है। मेरे दर्शन में
स्मरण साधना और
शास्त्र समझ से
महाराजश्री सम्पन्न
है। |
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-मोरारी बापू |
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परम पूज्य महाराजश्री
भारतीय संस्कृति के
गौरव है। श्री जयराम
आश्रम का सतत भौगोलिक
विस्तार (हरिद्वार,
ऋषिकेश, कुरूक्षेत्र,
दिल्ली आदि) तथा इसकी
संवर्धमान अनेक
योजनाएं, जिनके द्वारा
जन-जीवन की सभी
आधारभूत
आवश्यकताओं-स्वास्थ्य,
शिक्षा, अन्नक्षेत्र,
धर्म-सम्मेलन, गोसेवा,
विद्वत्परिषद्,
शास्त्रार्थ आदि की
पूर्ति की जा रही है,
निश्चय ही निराशा के
आधुनिक वातावरण में
आशा, आत्माविश्वास और
आस्तिकता का अमोघ
संदेश प्रदान कर रही
है। |
अध्यक्ष, परमार्थ
निकेतन,
ऋषिकेश |
-स्वामी
चिदानन्द सरस्वती
(मुनिजी) |
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परम पूज्य महाराजजी
के द्वारा संपन्न
श्रीमद्भागवतज्ञान
यज्ञ एवम् अन्य
महोत्सवों का मैं
साक्षी रहा हूॅ। आपकी
आयोजन क्षमता,
नेतृत्व कुशलता एवं
मार्गदर्शन प्रभावित
किए बगैर नहीं रहता।
पू0 महाराज जी की
सरलता, साहजता ओर
सजगता हम सभी के लिए
जीवन-पाथेय है। सेवा
के कई क्षेत्रों को
अपनी गौरवपूर्ण,
प्रेरक सेवा से
समृद्ध करते रहे।
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ई-2 आदित्य
एपार्टमैन्स, ऑल्ड
नागरदास रोड
अंधेरी (ई) मुम्बई-
400068 |
-रमेश भाई ओझा |
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परम ब्रह्मचारी जी
में वे सद्गुण
परिलक्षित होते है।
उपदेश को क्रियान्वित
करने वाले भारत के आप
वन्दनीय सन्त है। आपके
पास बैठकर वार्ता करने
से एक दिव्य आनन्दकी
अनुभूति होती है।
जिसका
मन प्रशान्त, जिसका
चित सम,
सौहार्द-भाव-पूर्ण
विचार, क्रोध पर विजय
हो- ऐसे सन्त का संग
ही मुक्ति का द्वार
है। महाराज जी के
द्वारा संस्थापित
संस्थाओं के द्वारा
कितना लोकोपकार हो रहा
है- यह मन भावना के
सागर मे गोता लगाता
है। |
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वृन्दावन |
-कृष्णचन्द्र
शास्त्री (ठाकुरजी) |
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मेरे हदयपटल पर
महाराज जी की विशेष
छाया अंकित है।
ब्रह्मचारियों की
परम्परा में संस्कृत
तथा वेदों की रक्षा
के साथ-साथ समाज -सेवा
का चिरस्मरणीय ऐसा
स्तुत्य महान् कार्य
किसी भी सन्त ने नहीं
किया, जैसा आपने किया
है। आप संकल्पसिद्ध
तो हैं ही, वाक्सिद्ध
महात्मा भी है। मैं
महाराज जी को किसी
दैवी शक्ति का साकार
रूप् या चमत्कारी
सिद्ध पुरूष मानता
है। |
श्री थाना आश्रम
खड़खड़ी, हरिद्वार |
-
सत्यपाल ब्रहाचारी
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इनकी जीवन गंगा लोक
कल्याणकारी कार्यो को
पार करती हुई आगे बढ़ी
है। |
कैलाश आश्रम
ऋषिकेश
|
-
स्वामी विद्यानन्द
गिरि |
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श्री देवेन्द्रस्वरूप
ब्रह्मचारी उन अद्भुत
व्यक्तियों में से
है, जिनके बल से
संस्थाएं चलती है। वो
जिस कार्य को हाथ में
लेते है, उसमें प्राण
फूंक देते है।
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आई-पी-एल-
वीर भद्र
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-कृपा नारायण
परियोजना प्रशासक |
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आपके अन्नक्षेत्र में
किसी प्रकार का
भेदभाव, जात-पात अथवा
छूआ-छूत नहीं है।
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23 मई, 1954
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- गिरधारी लाल
मन्ती,
उ-प्र- सरकार |
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ब्रह्मचारी देवेन्द्र
स्वरूप जी ने
सूर्यग्रहण मेला
कुरूक्षेत्र में बहुत
भारी अन्नक्षेत्र
लागाया।
साधू-सन्यासियों तथा
गृहस्थिया के ठहरने
तथा भोजन का अच्छा
प्रबन्ध था।
ब्रह्मचारी जी ने मेले
में प्रबन्ध करने वाले
अधिकारियों की बड़ी
सहायता की। |
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-लक्ष्मी वशिष्ठ
प्रशासक,
कुरूक्षेत्र |
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ब्रह्मचारी श्री
देवेन्द्र स्वरूप जी
वर्तमान समस्याओं तथा
देश पर चीन के आक्रमण
से उत्पन्न
परिस्थितियों से
भली-भाति जागरूक है।
स्थानीय जनता पर
ब्रह्मचारी जी के
व्यंतव का जिस प्रकार
का प्रभाव है, वे उसे
इस समय देश की रक्षा
के लिए लगा रहे है। |
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13 फरवरी, 1963 |
-रामनारायण पाण्डे
उपमन्त्री,
सिंचन (उ-प्र-) |
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श्री जयराम
अन्नक्षेत्र गरीबों
की सेवा, गायत्रीपाठ,
धर्म-कार्य मानवजाति
के कल्याण के लिए करता
है। यहॉ ठहरने का भी
अच्छा प्रबन्ध है।
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13 अक्टूबर, 1975
|
-ओ-पी महाजन
स्थानीय निकाय
एवं आवास मंत्री,
हरियाणा |
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मैं वास्तविक रूप से
प्रसन्न हुआ।
ब्रह्मचारी श्री
देवेन्द्रस्वरूप जी
आध्यात्मिक गुरू और
समर्पित व्यक्ति है।
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27 मार्च, 1978 |
-भारत में रायल नेपाल
राजदूत |
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प्राचीन संस्कृति और
धर्म की प्रसारक इस
संस्था के कामों को
देखकर दंग रह गया।
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अण्णामलाई यूनिवर्सिटी
तमिलनाडु
|
- डॉ- एम-जी-
मुत्थूकुमार स्वामी
वाईस-चांसलर |
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श्री जयराम विद्यापीठ
पवित्र एवं
नि:स्वार्थ सेवाओं से
प्राचीन भारत का सही
स्वरूप प्रकट करती
है। |
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2 मार्च, 1997
|
-जी-वी-जी-
कृष्णमूर्ति
चुनाव आयुक्त,
भारत, नई दिल्ली |
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मैने श्रद्धेय
देवेन्द्र स्वरूप
ब्रह्मचारी जी को एक
सच्चे कर्मशील
महापुरूष के रूप पाया
है। उनमें दूसरी की
शक्ति और साधनों का
श्रेष्ठ मानवहितकारी
कार्यो में सदुपयोग
करा लेने की अद्भूत
क्षमता है। उनकी
व्यक्ति की भी अच्छी
पहचान है। इसके साथ
ही आश्रम से जुडे बडे
से बड़े
निर्माण-कार्यो को
आत्यत सरलता से पूर्ण
करा देने का संकल्प
भी है ं। उनके कार्य
और व्यवहार में
नि:स्वार्थ और निश्छल
भावना की साफ झलक
मिलती है। जब किसी
व्यक्ति को लगता है
कि उनका सारा जीवन
धर्म और संस्कृति के
प्रचार और रक्षा में
लगा है तो वह उससे
जुड़े निर्माण ओर
विभिन्न आयोजनों में
कुछ भी करने के लिए
तैयार हो जाता है।
समाज में ऐसे कम लोग
होते है जिन पर लोगों
का ऐसा विश्वास जमता
है। आदर्शमय सेवा का
उनका जीवन सभी प्रकार
से लोगो के लिए
प्रेरक और अनुकरणीय
है। आज भी समाज में
उन जैसे सेवाधर्मी,
दृढनिश्चयी परोपकारी
व्यक्ति की बड़ी
आवश्यकता है जो आगे
आने वाली पीढ़ियों के
लिए प्रेरणा और
प्रकाश का सतंभ बना
रहे। |
चेयरमैन,
इन्डोरमा, नई दिल्ली |
-मोनलाल लोहिया |
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ब्रह्मचारी श्री
देवेन्द्रस्वरूपजी
महाराज मात्र एक नाम
नहीं, अपितु 20वीं सदी
की एक सनातन धरोहर
है। मैने इस कर्मयोगी
व्यंतव के सम्बन्ध मै
बहुत कुछ पूर्व में
सुना था, परन्तु
प्रथम बार लगभग 28
वर्ष पूर्व श्री
जयराम अन्नक्षेत्र,
ऋषिकेश में प्रथम
दर्शन प्राप्त किया
तथा इनकी
कर्मयोगीनिष्ठ
कार्यशैली का देखा।
अनायास वे मेरे
आकर्षण व प्रेरणा के
स्त्रोत बने। आपने
संस्कृत एवं संस्कृति
की उच्च शिक्षा
प्राप्त करने के
उपरांत नैष्ठिक
ब्रह्मचारी रहकर
समाजसेवा का व्रत
मात्र 16 वर्ष की
किशोर अवस्था में ही
ले लिया। भागीरथी का
आशीष प्राप्त करके
इनके द्वारा कर्मयोग
की भागीरथी प्रवाहित
हुई, जिसने देश के
पावन तीर्थ पर
धर्म-कर्म एवं सेवा
की त्रिवेणी को
निश्चित किया।
|
| |
-केदार नाथ मोदी |
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श्री ब्रह्मचारी जी
स्वयं देश के सजग
प्रहरी कर्मठ
युगपुरूष है जो
समन्वयवाद,
अध्यात्मवाद वं
सदाचार का प्रचार करते
है। आपके विचार सदैव
समतावादी रहे है। आप
शुद्ध आहार, शुद्ध
व्यवहार तथा शुद्ध
विचार की त्रिवेणी
प्रवाहित करते है।
आपका जीवन ऋषि मुनियों
की उच्च परंपराओं का
संरक्षण करता है।
शिक्षा-दीक्षा के साा
आपकी नम्रता, मधुरता
मिनलसारता व्यक्ति को
ऐसा प्रभावित करती
हैं कि व्यक्ति आपका
ही हो जाती है। आपकी
छाप अमिट होती है। आप
आमनी होते हुए भी
दूसरों को सदैव मान
देते थे। अत: आप हमेशा
समाज के महामान्य
रहेंगे। |
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-डॉ- स्वामी
श्यामसुन्दर दारस
शास्त्री |
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महाराज जनक के समान
विदेह और नि:स्पृह
सन्त है। इतना
वैभवपूर्ण विशाल ीावन
और जिसके ये स्वयं
संस्थापक और स्वामी
है, फिर भी अपने आराम
की परवाह किए बिना
यात्रियों के ठहराने
की चिंता है। वस्तुत:
ये त्यागी और विरक्त
सन्त है, जिनका समुचा
जीवन समाज-सेवा को
समर्पित है। ऐसे
श्रद्धास्पद
ब्रह्मचारी के चरणों
में नमन करता हुआ
ईस्वर से प्रार्थना
करता हॅू कि उनका
मंगलमय जीवन आलोक की
भाति जन-जन के कल्याण
का मार्ग प्रशस्त करता
रहे। |
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कलकत्ता |
-गोवर्धन अग्रवाल |
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धार्मिक चेतना के
प्रति विद्यापीठ की
आदर्शमयी भूमिका
राष्ट्र के चारित्रिक
उत्थान में महान
योगदान है। |
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-एन- शारदा देवी
पुत्री श्री
पी-वी- नरसिंह राव
भू-पू- प्रधानमंत्री,
भारत।
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