श्री जयराम ब्रह्मचर्य आश्रम ट्रस्ट, नई दिल्ली में यात्रियों के आवास हेतु आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे उपलब्ध हैं।

ब्रह्मलीन श्री देवेंद्र स्वरूप जी ब्रह्मचारी का परिचय

महापुरूषों का जीवनचरित एक देदीप्यमान प्रकाश स्तम्भ होता है, जिससे समाज को समय पर सन्मार्ग पर चलने के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त होते है। प्रात: स्मरणीय राष्ट्रसन्त संकल्पसिद्ध कर्मयोगी ब्रह्मलीन श्री देवेन्द्रस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज का जीवन-चरित भी इसी कोटि का रहा है, जिनकी जीवन गंगा समाज-कल्याण और राष्ट्र सेवा के सुदृढ तटों के मध्य प्रवाहित होती हुई मानवजाति के आध्यात्मिक उत्थान के लिए गतिशील रही है।

इस पावन जीवनगंगा के कतिपय अमृतबिन्दु श्रद्धालुजनों के कर कमलों में अर्पित है:

जन्मतिथि : फाल्गुनी अमावस्या वि- सं- 1981, तदनुसार 28 फरवरी, 1924 ई-।

जन्मस्थान : ग्राम ईगराह (जीन्द) हरियाण।

पिता : श्री मोहनलाल कौशिक।

माता : श्रीमती भागवन्ती (भागली) देवी।

परिवार : साधारण कृषक परिवार, पॉच भाई, एक बहन।

गुरूदेव : धुरन्धर वैयाकरण पूज्य श्री गंगास्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज।

गुरूदीक्षा : माघमास, वसन्त पंचमी, 1998 वि-सं- महाकुम्भ, प्रयाग।

गुरूभाई : ब्रह्मलीन सन्त श्री नारायणस्वरूप जी महाराज।

शिक्षा : वेद, वेदान्त, योग, धर्मशास्त्र, पुराण, स्मृति रामायण, महाभारत और गीता के मर्मज्ञ।

शिक्षागुरू : गुरूदेव जी गंगास्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, पं- गुणी राम शास्त्री, वेदान्तशिरोमणि पं- माया राम जी, पं- हरिराम जी, आहिताग्नि पं- बालक राम जी सारस्वत, स्वामी प्रभास भिक्षु जी।

सन्तसमागम : अनन्त श्रीविभषित जगदृगुरू शंकराचार्य श्री स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती जी (करपात्री जी महाराज), स्वामी ब्रह्मनन्द सरस्वती जी, स्वामी कृष्णबोधाश्रम जी, स्वामी प्रभास भिक्षु जी, स्वामी अभिनवसच्चिदानन्द तीर्थ जी, स्वामी निरंजनदेव तीर्थ जी, स्वामी भारती तीर्थ जी, स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी, स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज, विरक्त स्वामी रामदेव जी, सिद्ध सन्त स्वामी रामानन्दचार्य जी, श्री देवरहा बाबा, ज्ञानमूर्ति स्वामी चिदानन्द जी, वेदान्तवारिधि स्वामी माधवाश्रम जी, स्वामी विद्यानन्दगिरि जी, त्यागमूर्ति स्वामी गणेशानन्द जी, स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी, श्री प्रभुदत्त जी ब्रह्मचारी, स्वामी कल्याणदेव जी, स्वामी अखण्डानन्दजी, राष्ट्रसन्त श्री मोरारी बापू अभिनवशुक श्री रमेश भाई ओझा, श्री किशोर व्यास आदि का सन्निध्य।

जीवनलक्ष्य : भारतीय संस्कृति और संस्कृत के संरक्षण, वैदिक परम्परा के प्रचार,
धर्मशास्त्रों के अनुसरण, सन्तसम्मान, अतिथिसेवा, गोधन के संवर्धन, नारीजाति के उत्थान तथा असहायों की सहायता के सशक्त राष्ट्र का निर्माण।

राष्ट्रसेवा :
(क) संस्थाए: संचालित/ संस्थापित 24 संस्थाओं में से कुछ प्रमुख संस्थाए:

श्री यराम अन्नक्षेत्र, ऋषिकेश
1891 ई- में आदिगुरू श्री जयराम जी महाराज द्वारा स्थापित अन्नक्षेत्र का जीर्णोद्धार और नवनिर्माण। श्री संकटमोचन हनुमान मन्दिर, भव्य यज्ञशाला, सुविधा-सम्पन्न अतिथिगृ, होम्योपैथिक औषधालय, सत्संग भवन और संस्कृत महाविद्यालय।

श्री  जयराम आश्रम, हरिद्वार
1971 ई- में संस्थापित। श्रीराधाकृष्ण मन्दिर,सागरमन्थन, अन्नपूर्णा भवन, सत्संग भवन, धर्मार्थ अस्पताल, सचल झांकियॉ, पुस्तकालय, गंगा पर बना पुल तथा घाट।

श्री जयराम विद्यापीठ, कुरूक्षेत्र
1977 ई- में संस्थापित। मुख्य द्वार, वेदभवन और पॉच मन्दिर, बृहद् यज्ञशाला स्फटिक मणि निर्मित शिवलिंग, मूर्तियों की जुबानी महाभारत की कहानी, भीष्म पितामह की शय्या और कर्ण द्वारा दन्तदान, सप्तर्षि मन्दिर, दशावतार, नवदुर्गा, यात्री निवास विद्यापीठ से शिक्षित हजारों स्नातक विविध क्षेत्रों मे सेवारत।

श्री जयराम निवास, हरिद्वार
गुरू ब्रह्मलीन सन्त श्री नारायणस्वरूप ब्रह्मचारी जी द्वारा संस्थापित आश्रम का जीर्णोद्वार और नवनिर्माण। यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन और आवास की व्यवस्था।

श्री कस्तूरीराम मणिद्वीप आश्रम, हरिद्वार
गुरूभाई ब्रह्मलीन सन्त श्री नारायणस्वरूप ब्रह्मचारी जी द्वारा संस्थापित। सन्‌ 2004 में आश्रम का जीर्णोद्वार एवं नवनिर्माण श्री कस्तूरीराम चैरिटेबल ट्रस्ट, नरेला, दिल्ली द्वारा सम्पन्न। श्री शिव मन्दिर, यात्री निवास एवं ठहरने की नि:शुल्क सुविधा।

श्री गंगास्वरूप आश्रम, हरिद्वार
1992-1997 के मध्य भूपतवाला (हरिद्वार) में तीन मंजिले, आधुनिक सुविधा- सम्पन्न आश्रम का निर्माण। पंचदेव मन्दिर सत्संग भवन और यात्री निवास।

श्री जयराम ब्रह्मचार्य आश्रम दिल्ली
आदिगुरू श्री जयराम जी महाराज के शिष्य श्री कूटस्थ जी महाराज द्वारा स्थापित। इसमें 1990 ई- से वेद विद्यालय, प्रशिक्षण संस्थान, प्रवचन हाल, मन्दिर तथा सामुदायिक केन्द्र का निर्माण प्रारम्भ।

सेठ नवरंगराय लोहिया जयराम कन्या महाविद्यालय, लोहार माजरा
ग्राम पंचायत, लोहार माजरा (कुरूक्षेत्र) की प्रार्थना पर लोहिया परिवार के सौजन्य से 22 एकड़ भूमि पर निर्मित और 2001 ई- में उद्घाटित। कन्याओ के लिए स्नातक स्तर तक शिक्षा की उत्तम व्यवस्था।

ख) यज्ञानुष्ठान :
स्माज-कल्याण और राष्ट्रोत्थान हेतु 108 भागवत पारायण, 5 गायत्री पुरश्चरण, 7 सहस्रचण्डी महायज्ञ, 3 विष्णु महायज्ञ, 5 अखण्ड शतचण्डी महायज्ञ, 50 शतचण्डी महायज्ञ, 12 महारूद्र यज्ञ, 11 अभिषेकात्मक अतिरूद्र महायज्ञ (17 वर्षीय), एक हवनात्मक अतिनात्मक अतिरूद्र महायज्ञ। 1984 ई- से कुरूक्षेत्र में प्रतिदिन राष्ट्रसमृद्धि यज्ञ।

(ग) सम्मेलन :
अनेकों सन्त- सम्मेलन, धर्म-सम्मेलन, गोरक्षा सम्मेलन, अखिल भारतीय वैदिक सम्मेलन, अखिल भारतीय संस्कृत सम्मेलन, राष्ट्रीय संस्कृत संगोष्ठी, भारतीय संस्कृति प्रशिक्षण संगोष्ठी।

(घ) धार्मिक कथाओं का आयोजन :
ऋषिकेश, हरिद्वार ओर कुरूक्षेत्र में लगभग दो दर्जन धार्मिक कथाओं का आयोजन। मुख्य प्रवक्ताओं में राष्ट्रसन्त मोरारी बापू, भाईश्री रमेश भाई ओझा, आचार्य श्री किशोर व्यास, श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री, प्रोफेसर प्रेमा पाण्डुरंग, श्री कृष्णचन्द्र शास्त्री (ठाकुरजी) श्री के0 राजगुरू शास्त्री आदि। श्री मोरारी बापू के मुखारविन्द से श्रीरामकथा का पन्द्रह बार श्रवण।
(ड़) राष्ट्रीय चेतना :
भारत विभाजन के समय कुरूक्षेत्र में शरणार्थी शिविर। भारत पर चीनी और पाकिस्तानी आक्रमण के समय जनजागरण। हरियाणा में बाढपीडितों की सहायता। उत्तरकाशी में भूकम्पपीडितों की सहायता।

(च) जन कल्याण :

  • ऋषिकेश में नगरपालिका के अध्यक्ष। सिर पर मैला ढोने की प्रथा समाप्त, अध्यापिकाओं की समस्याओं का समाधान, दूध की उचित आपूर्ति, नगरपालिका के कर्मचारियों को उच्चतम वेतनमान, कालेज की स्थापना पर्वतखण्ड को हटाकर गंगाप्रवाह को मोडकर ऋषिकेश को बाढ में संरक्षण।

  • कुरूक्षेत्र में गीताजयन्ती समारोह को राष्ट्रीय उत्सव का दर्जा दिलवाया, हरियाणा के महामहिम राज्यपालों से परामर्श करके घर्मक्षेत्र कुरूक्षेत्र को विश्व के मानचित्र पर लाने का महान प्रयास किया।

  • शिक्षा के क्षेत्र में दो संस्कृत महाविद्यालय, तीन वेदविद्यालय, एक कन्या महाविद्यालय तथा एक विद्यालय।

(छ) नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं
श्री जयराम होम्योपैथिक अस्पताल, ऋषिकेश: श्री जयराम अस्पताल, हरिद्वार, श्री जयराम नेत्र एवं प्रसूति अस्पताल, नरवाना: सेठ नवरंगराय लोहिया जयराम महिला अस्पताल, लोहार माजरा जनसेवा में समर्पित। अनेक नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन।

(ज) दलितोत्थान :
ऋषिकेश एवं कुरूक्षेत्र में प्रतिवर्ष निर्धन परिवार की कन्याओं के सामूहिक विवाह। लगभग 4000 परिवार लाभाविन्त।

(झ) यात्री सेवा :
कुम्भ मेला प्रयाग, कुम्भ मेला हरिद्वार, सूर्चग्रहण मेला कुरूक्षेत्र और फल्गुन मेला फरल (कैथल) में हजारों यात्रियों के लिए भोजन, आवास और चिकित्सा की नि:शुल्क व्यवस्था।

(ञ) अन्नदान :
ऋषिकेश, हरिद्वार, कुरूक्षेत्र और दिल्ली के सभी आश्रमों मे यात्रियों, साधु-सन्तों और विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन व्यवस्था।

(ट) गोसेवा :
गोधन संरक्षण के लिए श्री जयराम गोशाला, जखोली (सोनीपत), श्री जयराम गोशाला, बेरी (झज्जर) श्री जयराम आदर्श गोशाला, पूण्डरी (कैथल) तथा श्री जयराम गोशाला, गुमानीवाला ऋषिकेश संचालित।

(ठ) पर्यावरण संरक्षण :
श्री जयराम आश्रम कृषि फार्म, गुमानीवाला ऋषिकेष, श्री जायराम कन्या महाविद्यालय, लोहार माजरा तथा श्री काम्यकेश्वर महादेव मन्दिर मन्दिर, कमोदा में वानिकी परियोजना की परिकल्पना।

स्वर्गारोहण :

  • मंगलवार भाद्रपद कृष्णाष्टमी वि- सं- 2061,

  • तदनुसार 7 सितम्बर, 2004 ई- प्रात: 8-25 बजे।

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